बताया जाता है कि डाक्टर मुहम्मद अलख़ज़री और उनके बेटे को बुरी तरह यातनाएं दी जा रही हैं। उनकी बेटी ने भी बल दिया है कि यह पता ही नहीं है कि सऊदी अरब ने उन्हें क्यों गिरफ़्तार किया। सऊदी अरब की जेलें, फ़िलिस्तीनियों और जार्डन के निवासियों से भरी हुई हैं और यह बंदी बहुत ही दयनीय स्थिति में जीवन गुज़ार रहे हैं।
एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल ने एक अर्थपूर्ण ख़ामोशी के बाद आख़िरकार अपना मुंह खोला और कहा कि हमास के प्रतिनिधि डाक्टर मुहम्मद अलख़ज़री और उनके बेटे डाक्टर हानी एक वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद हैं। डाक्टर खज़री और उनके बेटे को जेद्दा की राजनैतिक जेल ज़हबान में बंद किया गया है और उनको वकील करने की इजाज़त नहीं है।
एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल ने एक बयान जारी करके कहा है कि इन दोनों लोगों को हर प्रकार के अधिकारों से वंचित रखा गया है, इनका अपहरण किया गया, इनकी गिरफ़्तारी ग़ैर क़ानूनी है और उनको काल कोठरी में रखा गया है।
एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल ने कहा है कि डाक्टर खज़री को कैंसर है। इस संस्था ने सऊदी नरेश से अपील की है कि इन दोनों लोगों को बिना किसी पूर्व शर्त के तुरंत छोड़ दिया जाए।
डाक्टर ख़ज़री और उनके बेटे को डेढ़ साल पहले गिरफ़्तार किया और तीन महीने तक लगातार उनसे पूछताछ की गयी और इस दौरान भीषण यातनाओं से गुज़ारा गया। पूछताछ के दौरान उनसे हमास के साथ संबंधों, सऊदी अरब में उनकी गतिविधियों और अनेक प्रकार के सवाल पूछे गये।
तीन महीने के बाद उन्हें हफ़्ते में एक बार पांच मिनट के लिए अपने परिवार से संपर्क करने की अनुमति दी गयी जबकि मिलने की इजाज़त भी दी गयी लेकिन अचानक यह संपर्क ख़त्म कर दिए गये।
डाक्टर खज़री की बेटी ने अपने पिता और भाई की आज़ादी के लिए मध्यस्थों के बारे में बताया कि कुवैत नरेश शैख़ सबाह अलअहमद अलजाबिर और लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री साद हरीरी तक से आज़ाद कराने की सिफ़ारिश की गयी लेकिन सऊदी अरब ने डाक्टर खज़री और उनके बेटे के मुद्दे को अपना आंतरिक मुद्दा क़रार दिया है।
यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रमुख सैयद अब्दुल मलिक अलहूसी ने पिछले मार्च के महीने में सऊदी अरब के दो पायलटों और 9 सैन्य अधिकारियों के बदले सऊदी अरब की जेलों से हमास के बंदियों की स्वतंत्रता का प्रस्ताव दिया था लेकिन सऊदी अरब ने कोई जवाब नहीं दिया।